chandra ki drishti

चन्द्र दृष्टि का फल: सभी 12 भावों पर चंद्रमा की पूर्ण दृष्टि के प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, और माता का कारक माना जाता है। चंद्रमा की सप्तम दृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली और अमृत के समान शुभ माना जाता है। यह दृष्टि जिस भाव पर पड़ती है, उससे संबंधित क्षेत्रों में भावनात्मक गहराई, सुख, और कभी-कभी चुनौतियां लाती है। इस लेख में, हम सभी 12 भावों पर चन्द्र दृष्टि के फलों का विस्तृत वर्णन करेंगे, जो प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों पर आधारित है। यह जानकारी आपकी कुंडली को समझने और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चंद्रमा के प्रभाव को जानने में मदद करेगी।

चन्द्र दृष्टि का ज्योतिषीय महत्व

चंद्रमा की सप्तम दृष्टि पूर्ण रूप से प्रभावशाली होती है, और यह व्यक्ति के जीवन में भावनात्मक, मानसिक, और सामाजिक बदलाव लाती है। यह दृष्टि जिस भाव पर पड़ती है, उस भाव के गुणों को बढ़ाती है और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, धन, रिश्ते, और भाग्य को प्रभावित करती है। आइए, प्रत्येक भाव पर चन्द्र दृष्टि के फल को विस्तार से समझें।

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प्रथम भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

लग्न भाव पर चंद्रमा की दृष्टि व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवनशैली को प्रभावित करती है।

  • प्रवास और परिवर्तन: जातक को बार-बार स्थान परिवर्तन या विदेश यात्रा का योग बनता है।
  • महत्वाकांक्षा: महत्वाकांक्षी स्वभाव और उच्च लक्ष्यों की ओर अग्रसर।
  • सुख-सुविधाएं: ऐशो-आराम और शौक़ीन जीवनशैली।
  • स्त्रियों के प्रति आकर्षण: प्रेम और संबंधों में गहरी रुचि।
  • मितव्ययी प्रवृत्ति: कभी-कभी कंजूसी का स्वभाव।
  • सफलता: व्यवसाय या नौकरी में उन्नति और भाग्य का साथ।

द्वितीय भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

द्वितीय भाव पर चंद्रमा की दृष्टि धन और परिवार पर प्रभाव डालती है।

  • संतान सुख: अधिक संतानों की प्राप्ति, विशेषकर पुत्र।
  • उतार-चढ़ाव: सामान्य रूप से सुखी जीवन, लेकिन आर्थिक अस्थिरता।
  • स्वास्थ्य कष्ट: 8-10 वर्ष की आयु में शारीरिक समस्याएं।
  • धन हानि: अनावश्यक खर्च या आर्थिक नुकसान।
  • जल से खतरा: डूबने या पानी से संबंधित दुर्घटनाओं से सावधानी।
  • चोट-घाव: छोटी-मोटी शारीरिक परेशानियां।

तृतीय भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

तृतीय भाव पर यह दृष्टि साहस और सामाजिक संबंधों को मजबूत करती है।

  • धार्मिक प्रवृत्ति: आध्यात्मिक और धार्मिक झुकाव।
  • यात्रा प्रेम: बार-बार यात्राओं का शौक।
  • वाहन सुख: वाहनों की प्राप्ति, लेकिन भाइयों की संख्या कम।
  • पराक्रमी स्वभाव: 24 वर्ष की आयु से साहस और नेतृत्व क्षमता।
  • सत्संग: अच्छी संगति और सामाजिक मेलजोल।
  • मिलनसार: दोस्तों से मजबूत रिश्ते।

चतुर्थ भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

चतुर्थ भाव पर दृष्टि माता और सुख-सुविधाओं से जुड़ी होती है।

  • मध्य आयु में सुख: 24 वर्ष की आयु से सुख और समृद्धि।
  • राजकीय सम्मान: सरकारी क्षेत्र में लाभ या मान-सम्मान।
  • कृषि कार्य: भूमि और खेती से संबंधित सफलता।
  • वाहन और संपत्ति: वाहन और घर का सुख।
  • माता की सेवा: माता के प्रति समर्पण और देखभाल।

पंचम भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

पंचम भाव पर दृष्टि बुद्धि और संतान को प्रभावित करती है।

  • बुद्धिमानी: व्यवहार कुशल और रचनात्मक व्यक्तित्व।
  • पुत्र प्राप्ति: पहली संतान के रूप में पुत्र का योग।
  • कला और शिल्प: रचनात्मक क्षेत्रों में रुचि और सफलता।

षष्ठ भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

षष्ठ भाव पर यह दृष्टि स्वास्थ्य और शत्रुओं से संबंधित चुनौतियां लाती है।

  • शांत स्वभाव: संयमित और शांतिप्रिय व्यक्तित्व।
  • रोगों से कष्ट: गुप्त रोग या स्वास्थ्य समस्याएं।
  • शत्रु विरोध: शत्रुओं से परेशानी या प्रतिस्पर्धा।
  • अधिक व्यय: अनावश्यक खर्च की प्रवृत्ति।
  • जल से हानि: 24 वर्ष की आयु में जल से खतरे की आशंका।

सप्तम भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

सप्तम भाव पर दृष्टि वैवाहिक जीवन को सुखद और स्थिर बनाती है।

  • सुंदर जीवनसाथी: आकर्षक और सुखी वैवाहिक जीवन।
  • सत्यवादी स्वभाव: ईमानदारी और नैतिकता।
  • व्यापारिक लाभ: व्यापार से धन संचय।
  • कंजूसी: कभी-कभी मितव्ययी प्रवृत्ति।

अष्टम भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

अष्टम भाव पर दृष्टि दीर्घायु और संपत्ति से जुड़ी होती है।

  • पैतृक संपत्ति हानि: पुश्तैनी धन का नाश।
  • पारिवारिक विरोध: परिवार में मतभेद।
  • नेत्र रोग: आंखों से संबंधित समस्याएं।
  • लंपट प्रवृत्ति: आवारा या असंयमित स्वभाव।

नवम भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

नवम भाव पर दृष्टि भाग्य और धर्म को बढ़ाती है।

  • धर्मात्मा: धार्मिक और नैतिक स्वभाव।
  • भाग्यशाली: जीवन में सौभाग्य का साथ।
  • भाइयों से कष्ट: भाई-बहनों से सुख की कमी।
  • उच्च बुद्धि: गहन ज्ञान और बौद्धिक क्षमता।

दशम भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

दशम भाव पर दृष्टि करियर और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करती है।

  • पशु व्यापार: पशुधन या संबंधित व्यवसाय में रुचि।
  • धर्म परिवर्तन: धार्मिक विचारों में बदलाव।
  • पिता से मतभेद: पिता के साथ वैचारिक असहमति।
  • उग्र स्वभाव: चिड़चिड़ापन या क्रोध।

एकादश भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

एकादश भाव पर दृष्टि लाभ और सामाजिक संबंधों को बढ़ाती है।

  • आर्थिक लाभ: व्यापार और कार्य में सफलता।
  • कन्या संतान: अधिक पुत्रियों की प्राप्ति।
  • मित्रता: बहुत सारे दोस्त और सामाजिक प्रेम।
  • कुशल व्यवसायी: व्यापार में निपुणता।

द्वादश भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल

द्वादश भाव पर दृष्टि व्यय और मुक्ति से संबंधित होती है।

  • शत्रु द्वारा हानि: शत्रुओं से धन का नुकसान।
  • चिंताग्रस्त: तनाव और चिंता का स्वभाव।
  • राजकीय सम्मान: सरकारी क्षेत्र में मान।
  • जीवन के अंत में सुख: अंतिम चरण में शांति और समृद्धि।

निष्कर्ष

चन्द्रमा की दृष्टि ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मन और भावनाओं को नियंत्रित करती है। प्रत्येक भाव पर इसकी दृष्टि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करती है। हालांकि, चंद्रमा की स्थिति, अन्य ग्रहों के योग, और कुंडली के समग्र विश्लेषण के आधार पर फल भिन्न हो सकते हैं। सटीक भविष्यवाणी और उपाय के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें। यह लेख आपकी ज्योतिषीय जिज्ञासा को शांत करने और चन्द्र दृष्टि के प्रभाव को समझने में सहायक होगा।

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